Natasha

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मेरा नाम श्याम है। वैसे देखा जाए तो मैं बहुत शांति स्वभाव का हु जिसे प्राकृति की सुंदरता से बहुत लगाव है। मेरे घर से थोड़ी ही दूर एक पार्क है जहां शाम के वक़्त काफी भीड़ रहती है। एक दिन मैं भी शाम के वक़्त टहलते हु उस पार्क में चला गया। थोड़ी देर पार्क में टहलने दौरान मेरी नजर एक लड़की पे पड़ी। देखने से तो वो लड़की काफी परेशान लग रही थी। मैंने सोचा शायद उसकी कोई प्रॉब्लम होगी और फिर मैं पार्क टहलने लगा।


थोड़ी देर बाद वह लड़की वहा से चली गयी। लेकिन जहा वह बैठी थी वहां पे एक छोटा सा हैंड पर्स था। मैं वहा पे गया और उस पर्स को देखा तो उसमें कुछ पैसे और कुछ डॉक्युमेंट्स थे। मैं उस पर्स को लेकर पार्क में उस लड़की को ढूढ़ने लगा लेकिन मुझे वह नही मिली। फिर मैं उस पर्स को लेकर अपने घर आ गया।


घर आकर मैं उसके पर्स से उसका आइडेंटिटी कार्ड निकाला। ये ID Card उसके ऑफिस का था जिसमें स्नेहा नाम लिखा था। मैं अगली सुबह उसके ऑफिस गया और उसके बारे में एक वर्कर से पूछा तो उसने बताया कि स्नेह तो पिछले एक सप्ताह से आफिस नही आ रही है। मैंने उस वर्कर से स्नेहा के घर का एड्रेस पूछा तो उसने बताया कि यहां से 5 km की दूरी पे गुरुकुल कॉलोनी है वही पे वह रहती है।

सामने दिखाई देने लगा और कल की डिनर के बारे में सोचते हुए फिर मैं सो गया।


रात को स्नेहा के फ्लैट जाने से पहले मैंने तैयार होकर आईने के सामने खुदको लगभग 10 से 15 मिनट तक देखा। मैंने अपनी बाइक निकली और सीधा स्नेहा के फ्लैट में गया। स्नेहा ने बहुत प्यार से मुझे अंदर बुलाया।


फिर हम दोनों ने डिनर किया और मैंने स्नेहा से पूछा “आप अपना ऑफिस क्यों नही जा रहे हो”।


स्नेहा :- नही मैं ऑफिस जाऊँगी लेकिन अभी कोई प्रॉब्लम है।


अमन :- और वो प्रॉब्लम क्या है जिसे आप हमें नही बताना चाहते।


स्नेहा :- सच कहूं तो मुझे स्टीमर की प्रॉब्लम है और डॉक्टर ने ऑपरेशन करने को कहा लेकिन ऑपरेशन के लिए मेरे पास उतने पैसे नही है।


अमन :- मैं आपकी कुछ मदद कर सकता हु।


स्नेहा :- अरे नही, आपको तकलीफ़ उठाने की कोई जरूरत नही है।


डिनर खत्म करने के बाद मैं घर चला आया। लेकिन रात को मुझे नींद नही आ रही थी मैं सिर्फ स्नेहा के बारे में सोचता रहा। बहुत सोचने के बाद फिर मैंने तय किया मैं स्नेहा की मदद जरूर करूँगा।


अगले दिन मैं स्नेहा के फ्लैट में गया और उसे अपने साथ लेकर जाने को लेकिन वो मना करने लगी। मैं नही अपने जिद्द पे गया। मैंने स्नेहा को कहा “मैं तुम्हे ऐसे तकलीफ में नही देख सकता, तुम्हे ऐसे देखता हूं तो मुझे तकलीफ होती है, सच कहूं तो मुझे तुमसे प्यार हो गया है”। ये मेरी ये बात सुनकर स्नेहा रोने लगी और उसने मुझे कहा “अमन तुम मुझे पहले दिन से ही अच्छे लगने लगे तुम्हारी ईमानदारी और मासूमियत मेरे दिल को छू गई।



इन तीन मुलाक़ात में हम दोनों को एक दूसरे से प्यार हो गया। मैंने स्नेहा के ऑपरेशन कराने का सारा जिम्मा लिया और उसको एक अच्छे अस्पताल ले गया। वहा पे स्नेहा का ऑपरेशन सफलतापूर्वक हो गया। अब हम दोनों ने साथ रहने का फैसला कर लिया।


 


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